तेजप्रताप के रंग में रंगे तेजस्वी यादव, राजनीति से इतर अध्यात्मिक रंग में नजर आए

PATNA : राजद सुप्रीमों लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव अधिकतर आध्यात्मिक रंग में नजर आते हैं। तेजप्रताप यादव की मथुरा-वृंदावन की गलियों में घूमते हुए भी कई तस्वीरें सामने आई थीं। तेजप्रताप कई बार काशी नगरी भी गये हुए हैं। इतना ही नहीं, वे हमेशा संत की ड्रेस में भी नजर आते हैं। उनके ललाट पर आप हमेशा तिलक लगा हुआ देख सकते हैं। खुद को वे कन्‍हैया भी कहते हैं और बांसुरी भी उसी अंदाज में बजाते हैं। वहीँ अब तेजप्रताप यादव के छोटे भाई तेजस्वी यादव भी आध्यात्मिक रंग में रंगे नजर आने लगे हैं।

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आरजेडी नेता तेजस्वी यादव पर भी अब अपने बड़े भाई तेजप्रताप यादव का रंग चढ़ने लगा है। इस दौरान महोत्सव में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि संत कबीर का समता मूलक समाज की मशाल को जन-जन तक पहुंचाने में बहुत बड़ा योगदान रहा है। कहीं न कहीं तेजस्वी यादव राजनीतिक नजरिए से भी इस महोत्सव में शामिल होने गए। उनकी नजर वोटरों पर भी हो सकती है।  बता दें कि  शुक्रवार को पूर्णिया में तेजस्वी यादव एक अलग ही रंग में नजर आए। तेजस्वी पूरे अध्यात्मिक रंग में दिख रहे थे। पूर्णिया में 38वां कबीर महोत्सव का आयोजन किया गया था। इस समारोह में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव भी शामिल हुए। तेजस्वी यादव ने संत कबीर के समाज में दिए गए योगदान की प्रशंसा की और कहा कि कबीर वर्तमान समय में भी प्रासंगिक हैं।

महोत्सव में तेजस्वी यादव ने संत कबीर की पंक्तियों को दोहराते हुए कहा कि दुर्बल को न सताइए जाकि मोटी हाय, बिना जीव की हाय से लोहा भस्म हो जाय। उन्होंने कहा कि समाज में व्याप्त गैर बराबरी के समूल नाश के लिए संत कबीर आज सबसे ज्यादा प्रासंगिक हैं। तेजस्वी यादव ने वर्तमान परिस्थिति और संत कबीर के समय की तुलना करते हुए कहा कि आज की ही तरह कबीर के समय में देश संकट की घड़ी से गुजर रहा था। पहले भी हिन्दू-मुस्लिम, जात-पात में लोग बंटे हुए थे। उन्होंने कहा कि संत कबीर भक्तिकालीन एकमात्र ऐसे महापुरुष थे, जिन्होंने राम-रहीम के नाम पर चल रहे पाखंड, भेद-भाव, कर्म-कांड को व्यक्त किया था।