छात्र राजद के चुनाव पर तेजप्रताप ने कहा- मैं हूं लालू का लाल तो कैसे करेगा कोई सवाल

PATNA: तेजप्रताप यादव परिवार और पार्टी के लिए सिरदर्द बन चुके हैं। उन्होंने पार्टी के निर्णयों, नियमों-कानूनों को ताक पर रखकर छात्र राजद के प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव करवाया। वे अपने सरकारी आवास पर छात्र राजद के लिए चुनाव संपन्न कराया। बताया जा रहा है कि पार्टी के नेताओं को इस चुनाव के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

तेजप्रताप ने कहा पार्टी मेरी है और लालू मेरे पिता है तो किससे पूछे-

उनकी पार्टी के तरफ से चुनाव की कोई आधिकारिक सूचना भी जारी नहीं की गयी। इसके बावजूद बैलेट पेपर से तेजप्रताप ने खुद चुनाव संपन्न कराया। मीडिया द्वारा सवाल करने पर तेजप्रताप का कहना है कि पार्टी ही मेरी है। मैं लालू यादव का बेटा हूं और मेरे पिता को पता है कि यहां चुनाव हो रहा है। मैंने पापा को चिट्ठी के माध्यम से सारी जानकारी दे दी है। मैं जो कुछ भी करता हूं, उसकी सारी जानकारी पापा के पास रहती है।

LALU PARIWAR

गौरतलब है कि कुछ समय पहले तेज प्रताप यादव ने छात्र राष्ट्रीय जनता दल के संरक्षक पद से अपना इस्तीफा दे दिया था। अपने इस्तीफे के साथ ही उन्होंने ट्वीट कर अपने विरोधियों पर निशाना भी साधा था। उन्होंने लिखा था कि छात्र राष्ट्रीय जनता दल के संरक्षक के पद से मैं इस्तीफा दे रहा हूं।’ इसी के साथ तेज प्रताप ने एक शेर लिखकर इशारों ही इशारों में बहुत कुछ कह दिया। तेज प्रताप ने लिखा, ‘नादान हैं वो लोग जो मुझे नादान समझते हैं। कौन कितना पानी में है, सब खबर है मुझे।’

सृजन स्वराज छात्र राजद का प्रदेश अध्यक्ष चुना गया।

इसके बाद वे खुद चुनाव करवाये। इस चुनाव में कुल 738 लोगों ने मतदान किया। जिसमें से 380 मत सृजन स्वराज के को मिले तो 326 मत गगन यादव को मिले। इसी के साथ ही 32 मतों को अमान्य घोषित किया गया। देर तक चली मतगणना के बाद 54 मतों से सृजन स्वराज ने जीत हासिल की और उन्हें छात्र राजद का प्रदेश अध्यक्ष चुना गया।

आपको बता दें कि तेजप्रताप यादव हमेशा से पार्टी लिक से हटकर चलते हैं। वे पार्टी के निर्णयों के इतर काम करते हैं। लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान भी राजद के टिकट पर पार्टी से इतर अपने उम्मीदवार खड़ा करना चाहते थे, जिसके कारण दोनों भाईयों में विवाद भी हुआ था। इतना ही नहीं, वे राजद पार्टी के समानांतर लालू-राबड़ी मोर्चा खोल दिया और अपने ही पार्टी ने निर्णयों के खिलाफ आवाज उठाने लगे। इसका खामियाजा चुनाव में भी देखने को मिला। चुनाव में राजद को एक भी सीट नहीं मिली। अब 2020 में बिहार विधानसभा का चुनाव होने वाला है। अगर ऐसे वक्त में भी राजद पार्टी अपने नेताओं को संगठित नहीं रख पायेगी और तेजप्रताप इसी तरह पार्टी लीक से हटकर काम करते रहेंगे तो विधानसभा चुनाव भी प्रभावित हो सकता है।