एशिया की मीठे पानी की सबसे बड़ी झील अपने जीवन को बचाने के लिए लगा रही है बिहारियों से गुहार

PATNA :बिहार के बेगूसराय में स्थित कावर झील एशिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील है ।  लेकिन आज यह झील अपने अस्तित्व को बचाने  के संकट से जूझ रही है । आलम यह है कि सैकड़ों एकड़ में फैली यह झील पूरी तरह सूख चुकी है । संभावना जताई जा रही है कि अगर सरकार की ओर से समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो यह झील एशिया की सबसे बड़ी मीठे पानी के झील होने का गौरव समाप्त हो जाएगा ।

हर साल काफी संख्या में पर्यटक इस झील का भ्रमण करने आया करते थे । लेकिन इस साल झील के पूरी तरह सूख जाने के कारण पर्यटक आने से कतरा रहे हैं ।लोकसभा चुनाव में बिहार का यह गौरव कहीं से भी मुद्दा का विषय नहीं बन सका । बिहार सरकार के नेता जहां अपनी सियासत में माते हुए हैं तो वही प्रशासनिक अधिकारी भी इस झील को लेकर बिल्कुल लापरवाह बने हुए हैं । कभी प्रवासी पक्षियों का आकर्षण का केंद्र रही यह झील पूरी तरह सूख चुकी है ।

इस झील के सुखने से पर्यटन से रोजगार कमाने वाले लोगों के जीवन पर काफी बुरा असर पड़ रहा है । नाविकों के नाव सूखे झील में पड़े रहते हैं । न झील में पानी और न ही नांव से झील घुमने वाले पर्यटकों की कोई भीड़ । इस झील में मछलियों की कई प्रजातियां पाई जाती रही हैं । झील के पूरी तरह सूख जान के कारण मछलियों की सभी प्रजातियां समाप्त हो गई हैं । इसके कारण मछुआरों के रोजगार छीन गए हैं । उन्हें अपने परिवार के खर्चे को  चलाने में काफी दिक्कत हो रही है ।

कावर झील की पहले की स्थिति

कभी 15,000 एकड़ में फैलकर पर्यटकों को सैर कराने वाली यह झील आज संकरी नालों के रूप में सिमट कर रह गई है । आने वाले समय में अगर इस झील को पुनर्जीवित करने के लिए प्रशासन और सरकारी विभागों द्वारा ध्यान नहीं दिया गया  तो यह झील बिहार के एक अंतर्राष्ट्रीय पर्यटक स्थल के दर्जो को खो देगी ।