दोस्त खूब उड़ा रहे थे मजाक और लड़की सचमुच में बन गई आईएएस टॉपर

LIVE BIHAR DESK : जिस लड़की का उसके दोस्त मजाक उड़ा रहे थे, उसी लड़की ने देश की सर्वोच्च परीक्षा में सर्वोच्च स्थान हासिल कर सबके मुंह पर तमाचा जड़ दिया। मेधावियों की प्रेरक स्टोरी की श्रृंखला में आज हम बता रहे 2017 की आइएएस टॉपर नंदिनी केआर की कहानी।

खूब चिढ़ा रहे थे दोस्त : रिजल्ट निकलने से पहले नंदिनी केआर को उनके दोस्त खूब चिढ़ा रहे थे। एक सप्ताह से नंदिनी केआर अपने दोस्तों के मज़ाक के निशाने पर थीं। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक उन्हें बार-बार चिढ़ाया जा रहा था कि इस बार की सिविल सेवा परीक्षा को वो ही टॉप करेंगी। लेकिन जो बात उनके दोस्त मज़ाक में कह रहे थे वो आखिरकार सच साबित हो गई। जब सिविल सेवा परीक्षा के नतीजे आए तो उन पर यक़ीन करना नंदिनी के लिए मुश्किल था। आईएएस से पहले नंदिनी फ़रीदाबाद में भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी के तौर पर काम कर रहीं थीं।

सपना था आईएएस बनना : नंदिनी कहती हैं, “आईएएस बनना हमेशा से मेरा सपना था. अगर आप समाज का विकास करना चाहते हैं तो आप आईएएस बनकर ये बेहतर तरीके से कर सकते हैं.” कर्नाटक के कोलार ज़िले के एक शिक्षक की बेटी नंदिनी ने शुरुआती पढ़ाई सरकारी स्कूल से की है. बारहवीं की पढ़ाई के लिए वो चिकमंगलूर ज़िले के मूदाबिदरी आईं और परीक्षा में 94.83 प्रतिशत अंकों से पास की।


उन्होंने एमएस रमैय्या इंस्टीट्यूट से इंजीनियरिंग करने के बाद तुरंत कर्नाटक के पीडब्ल्यूडी विभाग में नौकरी कर ली। पीडब्ल्यूडी में काम करते हुए ही उन्होंने ज़मीनी स्तर पर सरकार का कामकाज देखा. वो कहती हैं, “तब ही मैंने सोचा कि मैं आईएएस अफ़सर बनकर समाज के लिए बेहतर काम कर सकती हूं.” अपने पहले प्रयास में उन्होंने 642वीं रैंक हासिल की और दिसंबर 2015 में आईआरएस सेवा ज्वाइन कर ली. इसकी ट्रेनिंग के दौरान ही नंदिनी ने दिल्ली में एक कोचिंग संस्थान के साथ जुड़कर तैयारी करने का निर्णय लिया।

बीटेक के बावजूद कन्नड़ विषय चुना वैकल्पिक पीडब्ल्यूडी में दो साल और आईआरएस में एक साल का अनुभव रखने वाली नंदिनी कहती हैं कि हमारा बुनियादी उसूल होना चाहिए, “हम जहां भी हों अपना सर्वश्रेष्ठ दें.” दो साल राज्य और एक साल केंद्र में नौकरी के बाद क्या उनकी प्रशासकों के बार में राय बदली है? नंदिनी कहती हैं, “काम पर अलग-अलग चुनौतियां होती हैं. लेकिन प्रशासन में बहुत कुछ सकारात्मक होता है.

काम करने के बेहतर अवसर होते हैं. हम निश्चित तौर पर विकास में अपनी भूमिका निभा सकते हैं.” नंदिनी कहती हैं, “एक आदर्श प्रशासक यदि इरादे का पक्का हो, अपने काम के प्रति समर्पित हो और चुनौतियां स्वीकार करने के लिए हमेशा तैयार रहे तो वो समाज के लिए बहुत कुछ कर सकता है.” नंदिनी अपने जिस दृढ़ संकल्प से शीर्ष तक पहुंची हैं और अपने दोस्तों की उम्मीदों पर खरी उतरी हैं, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि उनके लिए आदर्श प्रशासक बनना बहुत मुश्किल नहीं होगा. इंजीनियर होने के बावजूद नंदिनी ने कन्नड़ साहित्य को अपने वैकल्पिक विषय के रूप में चुना था. वो ओबीसी कैटेगरी से आती हैं.

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