बिहार की विरासत मिथिला पेंटिंग से सजने लगा है पूरा बिहार, ट्रेन से लेकर CM हाउस तक पंहुचा ये

PATNA : बिहार की विरासत मिथिला पेंटिंग अब रेलगाड़ियों पर देखने को मिल रही है। लोगों के घरों की दीवारों, मीटिंग हॉल, ट्रेनों-स्टेशनों और सार्वजनिक स्थानों के बाद मिथिला पेंटिंग या मधुबनी पेंटिंग के नाम से विख्यात है। मधुबनी चित्रकला अथवा मिथिला पेंटिंग मिथिला क्षेत्र जैसे बिहार के दरभंगा, पूर्णिया, सहरसा, मुजफ्फरपुर, मधुबनी एवं नेपाल के कुछ क्षेत्रों की प्रमुख चित्रकला है। ट्रेन के डिब्बों पर भी राज्य की पारंपरिक पेंटिंग देखने को मिल रही है।

राजधानी पटना में जगह जगह स्थानीय लोककला की मदद से शहर को आकर्षित बनाया जाएगा। प्रशासन द्वारा इसको लेकर कोशिश शुरू कर दी गई है। बिहार के मिथिला की चित्रकला अब प्रदेश के मुख्यमंत्री आवास तक पहुंच गई है। पटना राजधानी के 22 कोचों को भी मधुबनी पेंटिंग्स से सजाया जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पेंटिंग की तस्वीर टि्वटर पर साझा भी की है। दरभंगा जंक्शन पर भी वेटिंग हॉल और अन्य जगहों को मिथिला पेंटिंग से सजाया जा रहा है। माना जाता है ये चित्र राजा जनक ने राम-सीता के विवाह के दौरान महिला कलाकारों से बनवाए थे।

पटना स्थित प्रसिद्घ विद्यापति भवन की दीवारों पर भी कलाकार मधुबनी पेंटिंग उकेर कर इस भवन की रौनक बढ़ा रहे हैं। डिब्बों के अंदर और बाहर मधुबनी पेंटिंग्स के जरिए बेहतरीन साज-सज्जा की जा रही है। पेंटिंग में जनता से राजधानी पटना को स्वच्छ और सुंदर बनाने की अपील भी की जाएगी। मधुबनी पेंटिंग को भी राज्य के लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। चटख रंगों का इस्तेमाल खूब किया जाता है। जैसे गहरा लाल रंग, हरा, नीला और काला।

The legacy of Bihar's Mithila painting is now being seen on trains

कुछ हल्के रंगों से भी चित्र में निखार लाया जाता है, जैसे- पीला, गुलाबी और नींबू रंग। जिसमें कलाकारों ने वेतन की मांग न करते हुए 14 हजार वर्ग फीट की दीवार तो ट्रेडिशनल मिथिला स्टाइल में पेंट किया था। लेकिन स्थानीय कला की बदौलत आज यह स्टेशन देशस्तर पर सराहना पा रहा है।

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