दिवाली पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की ऐसी की तैसी, बच्चों ने जमकर फोड़े पटाखे, कहा- पापा की बात नहीं मानता, फिर तुम हो कौन

Patna : बिहार में अंधेरे पर उजाले के विजय के महापर्व ‘दीपावली’ की धूम है। बुधवार को शाम ढलते ही राजधानी पटना सहित पूरा बिहार रंग-बिरंगी रोशनी से नहा गया है। शाम ढलते ही घरों में दीये जलने लगे। बाजारों में शाम से ही रौनक दिखी। जमकर आतिशबाजी का दौर चला। खूब पटाखे फोड़े गए। रात भर पटाखों की आवाज से दिवाली का माहौल थमने का नाम नहीं ले रहा था।

एक मिनट , इससे पहले हम आपको एक बात याद दिला दे। बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों की बिक्री पर पूरी तरह से बैन लगाने से साफ इनकार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब कुछ दिन बाद ही दिवाली का त्योहार है। दिवाली पर पटाखे फोड़ने के लिए कोर्ट ने टाइम भी तय किया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक दिवाली पर शाम 8 से 10 बजे तक ही पटाखे फोड़े जा सकेंगे।

light of light on the light of 'Deepava

लेकिन यहाँ तो उल्टा ही दिखा सबकुछ , जहा 10 बजे के बाद सबकुछ मना था , वह तो पटाखों का सिलसिला ही रात के 9 -10 से शुरू हुआ था। ऐसे में बच्चों का कहना ही क्या , बच्चें जहां अपने माँ बाप की बात नहीं मानते , वह क्या वो सुप्रीम कोर्ट की बात मानेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाने वाले पटाखों के उत्पादन एवं बिक्री की अनुमति दी थी , जिनसे देशभर में कम उत्सर्जन होता । अदालत ने कहा था बाजार में केवल मानक डेसीबल ध्वनि सीमा वाले पटाखों की बिक्री को ही अनुमति मिलेगी।

जुलाई 2005 में ध्वनि प्रदूषण पर आए फैसले में ध्वनि की सीमा बताई गई थी। केवल वही पटाखे फोड़े जा सकेंगे जो इस सीमा में आते होंगे। जबकि लड़ियां और अधिक प्रदूषण वाले पटाखों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया था । ल्र्किन बीते रात दिवाली देख कर कही से नहीं लगा की सुप्रीम कोर्ट को कामयाबी मिली है। या उसके फैसले को सहराया गया है।अब क्या होता है अगले साल , पटाखे पूरी तरह बैन किया जाता है या , सुप्रीम कोर्ट फिर कोई नया नियम लगाता है।

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