उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने को इमर्जेन्सी नहीं अर्जेन्सी बताया

RANCHI : उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा है कि धारा 370 का हटना देश की अखंडता के लिए बहुत ज़रूरी था। ये कोई इमरजेंसी नहीं है बल्कि ये अर्जेन्सी थी। इस अनुच्छेद को व्यापक चर्चा के बाद ही हटाया गया है। उपराष्ट्रपति रांची में एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। आपको बता दें कि उपराष्ट्रपति कल रांची आये थे।

अनुच्छेद 370 को जम्मू कश्मीर से हटा दिया गया है और अब जम्मू कश्मीर दिल्ली की तरह केंद्र शासित प्रदेश होगा। साथ में लद्दाख अलग केंद्र शासित प्रदेश होगा लेकिन वहां विधानसभा नहीं होगी। ये विधेयक संसद से पास हो चुका है और राष्ट्रपति ने भी अपनी स्वीकृत दे दी है। शिक्षा की मैकाले व्यवस्था पर प्रहार करते हुए वेंकैया नायडू ने कहा कि देश का राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, उपराष्ट्रपति यहां तक कि झारखंड के मुख्यमंत्री ने भी कान्वेंट में पढ़ाई नहीं की। अपनी मातृभाषा में ही पढ़ाई कर आज इतने ऊंचे पद पर पहुंचे। उन्होंने अंग्रेजी सीखने को भी कहा, लेकिन मातृभाषा में बोलने, लिखने को जरूरी बताया।

आपको बता दें जहाँ एनडीए के अधिकतर दल इसका समर्थन कर रहे हैं तो वहीँ विपक्षी दल धारा 370 के हटाए जाने पर असमंजस में हैं। जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने पहले तो इसका विरोध किया था लेकिन अब उनके सुर भी बदल गए। वहीँ जेडीयू नेता आरसीपी सिंह ने अपने बयान से स्पष्ट कर दिया है कि धारा-370 पर कानून बन गया है, अब इस पर छाती पीटने से कोई फायदा नहीं है। उन्होंने कहा कि जब बहुमत के आधार पर फैसला किया गया हो तो इसके विरोध में छाती पीटना सही नहीं है।