जानें, जगन्नाथ मिश्र को सलामी देते समय क्यों नहीं चल सकीं थी गो’ली

PATNA : बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र के अंतिम संस्कार के समय उनको सलामी देनी थी लेकिन उस दौरान पुलिस के जवान एक भी बं’दूक नहीं चला सके थे। इस घटना से पूरे देश में बिहार की पुलिस की बेइज्जती हो गयी थी। लेकिन अब पता चला है कि ये किन कारणों से हुआ था। बताया जाता है कि सलामी के दौरान प्रयोग की गयी कार’तूस बीस साल पुरानी थीं।

जानकारी के मुताबिक ये सभी कारतू’स 1996 में बनी थी। इनके सही रखरखाव के साथ ये तीन सालों तक चल सकती है लेकिन सुपौल पुलिस ने बीस साल बाद इनका प्रयोग जगन्नाथ मिश्र को सलामी देते समय कर दिया। सुपौल पुलिस लाइन ने एक्सपायरी के 20 साल बाद इन्हें इस्तेमाल करने के लिए राय’फलों में भरवा दिया था।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने  जगन्नाथ मिश्रा के अंतिम संस्कार के दौरान रायफलों से फायरिंग नहीं होने की खबर ने सुपौल से लेकर पुलिस मुख्यालय में खलबली मचा दी थी।

इस घटना के बाद में जब कारतूसों की जांच की गई तो पता चला कि पुलिस लाइन के आर्मरर ने एक्सपायरी ब्लैंक का’र्टरीज़ जवानों को दे दी थी। जिससे वो मौके पर नहीं चल सकीं। ये घटना पूरे पुलिस विभाग को शर्मसार कर रही है। फिलहाल ऐसी बड़ी लापरवाही करने के कारण इस मामले में आर्मरर को निलंबित कर दिया गया है। आपको बता दें कि ब्लैंक कार्टरिज किसी वीआईपी के अंतिम संस्कार के दौरान इस्तेमाल होता है। बिहार के सभी पुलिस लाइन के रक्षित शाखा में इसे रखा जाता है। इसके प्रभारी पुलिस लाइन के आर्मरर होते हैं। ब्लैंक कार्टरिज में बुलेट नहीं होता है।